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आसान नियम, कम कंप्लायंस बोझ, तेज स्वीकृति, सशक्त डिजिटल सिस्टम्स - व्यापार शुरू करना, आगे बढ़ाना अब हुआ और तेज व आसान।

एक दशक पूर्व भारत में स्टार्टअप शुरू करना और उसे बढ़ाना काफी मुश्किल था। इसकी वजह थी कई तरह की मंजूरियां, जटिल कागजी काम और छोटी-छोटी गलतियों पर भी भारी सजा का डर। उस समय स्टार्टअप का माहौल सिर्फ कुछ बड़े शहरों तक ही सीमित था, और नियमों का बोझ नए विचारों और जोखिम लेने की सोच को रोकता था।

प्रक्रियागत सुधार भारत के आर्थिक परिवर्तन के प्रमुख स्तंभों में से एक बनकर उभरे हैं, जिन्होंने निरंतर “ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस” की आधारभूमि को नई दिशा दी है। यह दृष्टिकोण शासन व्यवस्था की दैनिक कार्यप्रणाली को सरल, प्रभावी और पारदर्शी बनाने की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जन विश्वास सुधार को भरोसे पर आधारित शासन व्यवस्था की बहुस्तरीय और लगातार विकसित होती संरचना के रूप में देखा जाता है। यह मोदी काल की आर्थिक सोच की सबसे महत्वपूर्ण पहचान में से एक बन चुका है जिसने पारंपरिक नियामक व्यवस्था की सख्त धारणा से अलग रास्ता अपनाया है।

पिछले 11 वर्षों में व्यापार करने में सुगमता केवल सुधारों की एक साधारण सूची भर नहीं रही बल्कि यह शासन की एक व्यापक कार्यशैली में बदल चुकी है। विशेष रूप से पिछले एक वर्ष में इसकी वास्तविक कहानी केवल बेहतर वैश्विक रैंकिंग या अलग-अलग घोषणाओं तक सीमित नहीं है। बल्कि सबसे बड़ा परिवर्तन उस सोच में दिखाई देता है। जहां वर्ष 2014 से पहले के अस्थायी और अव्यवस्थित सुधारों की जगह अब पूरी तरह व्यवस्थित और स्थायी व्यवस्था ने ले ली है। व्यापार करने में सुगमता अब कोई अस्थायी अभियान नहीं अपितु शासन व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बन चुकी है।