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डिजिटल एक्सेस, यूनिवर्सल इंश्योरेंस, निःशुल्क दवाइयां और व्यापक हॉस्पिटल चैन - हर नागरिक को समय पर, सस्ती और समावेशी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करता भारत।

प्रधानमंत्री नरेंद्र के नेतृत्व में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा और स्थायी बदलाव आया है। कई दशकों तक यह व्यवस्था मुख्य रूप से बीमारी बढ़ जाने के बाद इलाज करने पर आधारित थी। लेकिन अब स्वास्थ्य व्यवस्था तेजी से बीमारी की रोकथाम, शुरुआती पहचान और समय पर इलाज पर केंद्रित हो रही है। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में टीबी, एनीमिया और दूसरी संक्रामक व गैर-संक्रामक बीमारियों का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता रहा है, जो आर्थिक रूप से सबसे कमजोर हैं, जैसे गरीब, कुपोषित और वे लोग जो इलाज के लिए बहुत देर से अस्पताल पहुँचते हैं।

21 जून, 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कर्तव्यपथ पर आयोजित विशाल योग कार्यक्रम में लगभग 36 हजार लोगों के साथ योग किया। पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए। यह केवल एक प्रतीकात्मक क्षण नहीं था, बल्कि एक स्पष्ट नीति की घोषणा भी थी। अगले दस वर्षों में इस सोच को बजट, संस्थागत विस्तार और राजनीतिक स्तर पर लगातार मजबूत समर्थन मिला जो सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में बहुत कम देखने को मिलता है।

टीके स्वास्थ्य क्षेत्र के उन चुनिंदा बचाव के उपायों में शामिल हैं जो एक ही समय पर जीवन बचाते हैं, दिव्यांगता को रोकते हैं और परिवारों को भारी इलाज खर्च के बोझ से सुरक्षित रखते हैं।

पहले भारत में लोग स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए गए हर 100 रुपये में से लगभग 63 रुपये अपनी जेब से खर्च करते थे। यानी इलाज का लगभग तीन-चौथाई खर्च लोगों को खुद उठाना पड़ता था।