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रोड, रेल, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति देता भारत - कनेक्टिविटी, आर्थिक अवसरों और राष्ट्रीय विकास को अभूतपूर्व मजबूती।

2000 के शुरुआती वर्षों में और उसके बाद भी भारत में हवाई यात्रा आम लोगों के लिए काफी दूर की बात थी। छोटे शहरों और कस्बों के परिवारों के लिए हवाई अड्डे तक पहुँचना भी मुश्किल होता था। कई जगहों पर सीधी हवाई सेवा नहीं थी, इसलिए लोगों को उड़ान से पहले बड़े शहरों तक पहुँचने के लिए लंबी रेल या सड़क यात्रा करनी पड़ती थी। उस समय हवाई यात्रा को आम परिवहन नहीं, बल्कि व्यापारियों और शहरी मध्यम वर्ग की सुविधा के रूप में माना जाता था।

एक दशक पूर्व भारत की अवसंरचना व्यवस्था गंभीर दबाव और चुनौतियों से जूझ रही थी। जुलाई 2012 में देश ने विश्व के सबसे बड़े बिजली संकटों में से एक का सामना किया, जब 62 करोड़ से अधिक लोग अंधकार में डूब गए थे।ट्रेनें बीच रास्ते में रुक गईं, यातायात संकेतक काम नहीं कर रहे थे, कारखाने बंद हो गए और बिजली की कमी के कारण बंदरगाहों पर भी काम रुक गया, जिससे लगातार देरी हो रही थी। गड्ढों वाले राजमार्गों पर ट्रक बहुत धीरे चलते थे, इसलिए दिल्ली से मुंबई की यात्रा में 5 से 6 दिन लग जाते थे। भीड़भाड़ वाले बंदरगाहों पर जहाजों को 93 घंटे तक इंतजार करना पड़ता था।उच्च लॉजिस्टिक लागत और कमजोर संपर्क व्यवस्था देश की आर्थिक वृद्धि में एक बड़ी बाधा बन चुकी थी।

कुछ साल पहले तक मिजोरम की राजधानी आइजोल पहुंचना बेहद कठिन माना जाता था। वहां तक जाने के लिए लोगों को लंबी और थका देने वाली सडक यात्रा करनी पडती थी, जहां जगह-जगह भूस्खलन, टूटी सडकें और कई दिनों का सफर आम बात थी। जम्मू-कश्मीर में भी श्रीनगर की यात्रा मौसम और कठिन पहाडी रास्तों के कारण अक्सर अनिश्चित बनी रहती थी। वहीं दिल्ली और मेरठ के बीच रोज ऑफिस जाने वाले लोग ट्रैफिक में फंसकर 3 से 4 घंटे बिता देते थे। हालत यह थी कि काम शुरू होने से पहले ही लोग थक जाते थे।

एक समय था जब भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी, रुकावटें और काम का अटक जाना आम बात थी। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक है, जिसे अब ‘अटल सेतु’ के नाम से जाना जाता है। कई दशक पहले प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट को नीतिगत अड़चनों, मंजूरियों और निर्माण से जुड़ी चुनौतियों के कारण बार-बार देरी का सामना करना पड़ा और आखिरकार यह कई साल बाद पूरा हो सका।