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डिजिटल विभाजन से वैश्विक डिजिटल लीडरशिप तक पहुंचता भारत, दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम, इंटरनेट विस्तार और स्पेस, सेमीकंडक्टर व इलेक्ट्रॉनिक्स में अग्रणी

वर्ष 1984 में जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से पूछा गया कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है, तो उन्होंने जवाब दिया था-“सारे जहाँ से अच्छा।” यह पल देश के लिए गर्व और भारत के वैज्ञानिक सपनों का प्रतीक बन गया।

कल्पना कीजिए वर्ष 2014 के उस भारत की, जहाँ किसी दूरस्थ गाँव का किसान अपनी फसल से जुड़ी सामान्य सलाह पाने के लिए हफ्तों तक प्रतीक्षा करता था। कीट नियंत्रण के लिए वह अनुमानों और पारंपरिक अनुभवों पर निर्भर रहता था। उसके पास अपनी खेती को आधुनिक तकनीक से देखने या प्रबंधित करने के प्रभावी साधन उपलब्ध नहीं थे। इसी अवधि में, भारत का एक युवा इंजीनियर, जो इंटेलिजेंट सिस्टम्स विकसित करने और नवाचारों के सपने देखता था, सीमित कंप्यूटिंग क्षमता और ड्रोन जैसी उभरती तकनीकों पर लगाए गए कठोर नियमों के कारण अपने विचारों को अमल में लाने में असमर्थ था। परिणामस्वरूप, उसे अवसरों की तलाश में विदेशों का रुख करना पड़ता था।

भारत में एक ऐसा भी समय था जब डिजिटल भुगतान को संदेह की दृष्टि से देखा जाता था। एक पूर्व वित्त मंत्री ने वर्ष 2017 में संसद में कैशलेस अर्थव्यवस्था की व्यवहारिकता पर प्रश्न उठाया था। ऐसा देश जहां अधिकतर लेनदेन नकद होता है वहां ऑनलाइन भुगतान के विचार का भी उन्होंने मजाक उड़ाया था।
एक ऐसा भी समय था जब भारत के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाने का वास्तविक अवसर था, लेकिन दूरदर्शी सोच और स्पष्ट नीतियों के अभाव में वह अवसर हाथ से निकल गया। वर्ष 1957 में इंटेल की पूर्ववर्ती कंपनी फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर्स ने भारत में पैकेजिंग इकाई स्थापित करने की संभावना पर विचार किया था। लेकिन, यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी और बाद में वही अवसर मलेशिया के लिए एशिया के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर पैकेजिंग केंद्र में बदल गया।