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रिकॉर्ड खरीद, आय सहायता, डिजिटल एक्सेस, सब्सिडी और तकनीक आधारित सुधारों से किसान कल्याण को सशक्त बनाता भारत, हर अन्नदाता को समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित

भारत में किसानों को देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मूल आधार माना जाता है। उनके महत्व को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने किसानों को सशक्त बनाने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है। यह दृष्टिकोण दशकों से हमारे अन्नदाताओं के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान करने के उद्देश्य से प्रेरित है, जिसमें तकनीक के उपयोग, ऋण सुविधा के विस्तार, जोखिम से सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास तथा बाज़ार सुधारों को समाहित करते हुए एक सुविचारित रणनीति बनाई गई है।

रिफॉर्म, हर ‘अन्नदाता’ के कल्याण को प्राथमिकता देने वाली नीतियों और भारतीय कृषि के लिए बेहतर माहौल बनाने वाले कदमों ने मिलकर बदलाव के एक नए दौर की शुरुआत की है।

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार कृषि क्षेत्र है, जो आबादी के एक बड़े हिस्से को रोज़गार और आजीविका प्रदान करता है। कृषि को प्राथमिक क्षेत्र माना जाता है, क्योंकि यह लगभग 42.3 प्रतिशत आबादी को आजीविका का सहारा देता है और देश की GDP में इसका हिस्सा 18.2 प्रतिशत है।

एक ऐसे दौर में जब जलवायु परिवर्तन, वैश्विक संघर्षों और बढ़ती आबादी के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है, भारत पूरी दुनिया के लिए एक उम्मीद बनकर उभरा है। भारत अब अपनी 140 करोड़ की आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने से कहीं आगे निकल चुका है। पिछले एक दशक में देश एक महत्वपूर्ण वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है और कृषि उत्पादन की कई श्रेणियों में शीर्ष स्थान पर पहुँच चुका है। वर्ष 2024-25 में देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 357.73 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) तक पहुँच गया। यह वर्ष 2013-14 के मुकाबले 43 प्रतिशत ज्यादा है। साथ ही, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों का निर्यात लगातार बढ़ता रहा और वित्त वर्ष 2024-25 में यह 51 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक तक पहुँच गया है।