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बड़े निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और डिजिटल समावेशिता से ऐतिहासिक विकास - पूरे क्षेत्र में उद्यमिता और अवसरों को नई ऊंचाई।

पूर्वोत्तर भारत 'विकसित भारत' के विज़न का एक अहम केंद्र बनकर उभरा है और इसने एक अशांत सीमांत क्षेत्र के रूप में अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ दिया है। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस क्षेत्र में ज़बरदस्त बदलाव आया है। यह क्षेत्र उग्रवाद-ग्रस्त, संघर्ष-पूर्ण और अविकसित क्षेत्र की पहचान मिटाकर समग्र विकास और बेजोड़ कनेक्टिविटी के केंद्र के रूप में उभरा है। यह बदलाव मोदी सरकार के केंद्रित नीतिगत परिवर्तन और समावेशी शासन का परिणाम है।

विकास का असली मतलब तब खत्म हो जाता है, जब वह आखिरी छोर तक नहीं पहुँच पाता। तरक्की तब तक अधूरी रहती है, जब तक वह हर नागरिक को समान रूप से न छू ले। और कई दशकों तक पूर्वोत्तर भारत की यही हकीकत रही।

पूर्वोत्तर भारत, जिसमें आठ राज्य शामिल हैं और जिसकी अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ चीन, म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान से लगती हैं, भारत की सुरक्षा और आर्थिक आकांक्षाओं के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है।

आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्क्रॉल करते समय अक्सर पूर्वोत्तर भारत के अनदेखे और मनमोहक पर्यटन स्थलों की आकर्षक तस्वीरें दिखाई देती हैं। लेकिन ये दृश्य एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाते हैं, इतनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि से भरपूर ये स्थान दशकों तक अधिकांश यात्रियों की पहुँच से बाहर क्यों रहे?